Sunday, 2 December 2012

अनुशासनात्मक/न्यायालयीन कार्यवाही के दौरान पदोन्नति प्रक्रिया के मार्गदर्शी सिद्धांत जारी(पटवारी हैंडबुक)

अनुशासनात्मक/न्यायालयीन कार्यवाही के दौरान पदोन्नति प्रक्रिया के मार्गदर्शी सिद्धांत जारी

राज्य शासन ने शासकीय सेवकों के लिये लम्बित अनुशासनिक कार्यवाही के दौरान उनकी पदोन्नति, स्थायीकरण आदि प्रक्रिया के संबंध में मार्गदर्शी सिद्धांत निर्धारित किये हैं। शासन के सभी विभाग, अध्यक्ष राजस्व मण्डल, ग्वालियर, विभागाध्यक्ष, संभागीय आयुक्त, कलेक्टर तथा समस्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को जारी निर्देशों का पालन कड़ाई से सुनिश्चित करने को कहा है।
   शासन के शासकीय सेवकों के विरुद्ध लम्बित अनुशासनात्मक/न्यायालयीन कार्यवाही के दौरान उनके प्रकरणों में विभागीय पदोन्नति समिति के निष्कर्ष मोहरबंद लिफाफे में रखे जाने के निर्देश हैं। ”इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि नीचे लिखे उल्लेखित बंद लिफाफे की प्रक्रिया केवल ऐसे शासकीय सेवकों के लिये अपनाई जायेगी, जिनके विरुद्ध या तो अनुशासनात्मक कार्यवाही के अंतर्गत आरोप-पत्र वास्तविक रूप से जारी कर दिया गया हो या जिनके विरुद्ध अभियोजन-पत्र वास्तव में अदालत में पेश किया गया हो।“
   यह भी उल्लेख किया गया है कि जब किसी शासकीय सेवक की पदोन्नति के लिये उपयुक्तता के संबंध में विभागीय पदोन्नति समिति के निष्कर्ष मोहरबंद लिफाफे में रखे गये हों, तो रिक्ति को भरने के लिये सक्षम प्राधिकारी द्वारा उच्च ग्रेड में इस रिक्ति को स्थानापन्न आधार पर ही भरा जाये। जब शासकीय सेवक को पूर्णतः दोष-मुक्त कर दिया जाता है, तो उस स्थिति में मोहरबंद लिफाफा खोला जायेगा और उसकी पदोन्नति की तारीख, मोहरबंद लिफाफे में रखे गये निष्कर्षों में, उसके लिये निर्धारित क्रमानुसार तथा इस क्रम में उससे ठीक नीचे के कनिष्ठ अधिकारी की पदोन्नति की तारीख के संदर्भ में निर्धारित की जायेगी। ऐसे शासकीय सेवक को यदि जरूरी हो, तो स्थानापन्न आधार पर कार्य करने वाले सबसे बाद में पदोन्नत किये गये व्यक्ति को पदावनत कर पदोन्नत किया जा सकता है।
   इसी प्रकार कतिपय विभागों में शासकीय सेवक को पूर्णतः दोष-मुक्त कर देने के बाद उसकी पदोन्नति में इसलिये विलम्ब होता है, क्योंकि उसके संबंध में सिफारिश बंद लिफाफे में से कारण उस रिक्त पद के विरुद्ध कनिष्ठतम लोक-सेवक की स्थानापन्न पदोन्नति करने के फलस्वरूप रिक्ति उपलब्ध नहीं रहती है। दूसरी ओर कनिष्ठतम लोक-सेवक को पदावनत किया जाता है तो वह न्यायालय की शरण में चला जाता है। सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र दिनांक 30 जून, 1994 की कण्डिका-3 (1) के प्रावधान का उल्लेख पदोन्नति समिति बैठक के कार्यवाही विवरण में नहीं होने के कारण ऐसे न्यायालयीन प्रकरण में शासन की ओर से पक्ष समर्थन में कठिनाई होती है।
    यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस स्वरूप के प्रकरणों में विभागीय पदोन्नति समिति के कार्यवाही विवरण में स्पष्ट उल्लेख किया जाये कि 30 जून, 1994 के परिपत्र की कण्डिका-2 (1) में उल्लेखित परिस्थिति के फलस्वरूप यदि किसी शासकीय सेवक के संबंध में सिफारिश बंद लिफाफे में रखी गई हो और उसकी रिक्ति को कनिष्ठतम लोक-सेवक की पदोन्नति से स्थानापन्न रूप से भरा गया हो तो संबंधित शासकीय सेवक के पूर्णतः दोष-मुक्त हो जाने पर उसे तत्काल पदोन्नति दी जायेगी। आवश्यक होगा तो कनिष्ठतम लोक-सेवक को पदावनत किया जायेगा।
    इसके अलावा कनिष्ठतम लोक-सेवक के पदोन्नति आदेश में इस आशय का उल्लेख आवश्यक रूप से किया जायेगा कि परिपत्र दिनांक 30 जून, 1994 की कण्डिका-2 (1) में उल्लेखित परिस्थिति के फलस्वरूप प्रकरण में बंद लिफाफे की प्रक्रिया अपनाई गई है और उसकी रिक्ति को कनिष्ठतम लोक-सेवक की स्थानापन्न पदोन्नति से भरा जा रहा है। संबंधित शासकीय सेवक के पूर्णतः दोष-मुक्त हो जाने पर उसे तत्काल पदोन्नति दी जायेगी तथा आवश्यक पद उपलब्ध न होने पर संबंधित कनिष्ठतम लोक-सेवक को पदावनत किया जायेगा।


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